राजनीति का उंट !

जाने किस करवट बैठेगा,
राजनीति का उंट !
सावन की हरीतिमा मिलेगी ,
या पतझड़ के ठूंठ !
क्या सच्चाई सूंघ सकेगा,
यह अँधा क़ानून?
पूछ रहा है चीख-चीख ,
सतरूपा-सुता का खून!
क्या मातृवत लख पायेगा
परदारा को पिशाच कभी?
क्या वक़्त के यक्ष प्रश्न का,
मिल पायेगा जबाब कभी?
क्या दामिनी सी सहमी बेटी,
निकलेगी घर से बेख़ौफ़?
या फिर इसी तरह मरेगी,
हअवा की बेटी बेमौत ?
क्या मरियम की सुता देश में ,
यूँ ही नोची जाएगी?
क्या ऋषियों की भूमि उर्वरा ,
अब बंजर हो जाएगी ?
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