जश्न-ए-आजादी!

अडसठ साल व्यतीत हुए ...
लगता है ज्यों कल की बात ...
देश हमारा छोड़ के दुश्मन
भागा था घर आधी रात ....
पहली किरण ले कर आई थी
उस दिन कुछ ऐसा पैगाम
हर्षाया था जन-गण-मन
लेकर आजादी की मुस्कान ...
अश्रुधार थी हर आँखों में
हर मन बहका –बहका सा था ...
आजादी की नव बयार से,
हर आँगन महका –महका सा था ...
याद शहीदों की ले मन में
लहराई थी बड़े शान से,
लाल किले पर तीन रंग की
विजय पताका आसमान  में...
कोटि –कोटि कंठो से निकली
थी जयकार हिन्द की उस दिन
आजादी की डोली से जब
नयी सुबह उतरी थी इस दिन....
नया जोश –नूतन स्वप्नों का
मन में नव उत्साह भरे
दिवस स्वतंत्रता सदा सर्वदा
नवल शक्ति संचार करे ...
आओ मिलकर आजादी का
मिलकर गौरवगान करें
वीर शहीदों के स्वप्नों का
नव भारत निर्माण करें !


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